Add To collaction

बाल साहित्य रचना



 बाल साहित्य रचना

हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं 
 तुतलाती तुतलाती बोली मन के सच्चे हैं
 बढ़ जाएंगे कदम हमारे खुले आसमान में 
अच्छे काम करेंगे हम भी भारत मां की शान में
 तूफानों से टकराना तो खूब मन को भाता है 
आगे बढ़ना और संभलना यह भी हमको आता है 
वीर तिलक करे माटी का सदा रक्त का नाता है
 हम हैं कर्मवीर भारत के धरती भारत माता है

रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान

   1
0 Comments